Tuesday, 18 July 2017

जाने श्रावन का महत्व

क्यु प्रिय है श्रावन शिव जी को :-धार्मिक मान्यताओं के अधार पर सावन महीने के बारे में सबसे प्रचलित पौराणिक कथा के मुताबिक शिव पत्‍नी देवी सती के अपने पिता दक्ष के घर योगशक्ति से शरीर त्यागने से पूर्व उन्‍होंने शिव जी को हर जन्म में पति के रूप में पाने का प्रण किया था। इसीलिए उन्‍होंने अपने दूसरे जन्म में पार्वती के रूप में भगवान शिव जी की पूजा की और सावन के महीने में कठोर तप किया। इस पूजा से प्रसन्‍न होकर शिवजी ने उनसे विवाह कर लिया। तभी से ये महीना शिव जी के लिए प्रिय हो गया। ये कथा स्‍वयं शिजी ने सनत कुमारों को सुनाई थी जब उन्‍होंने सावन का महीना प्रिय होने के बारे में पूछा था। एक अन्‍य पौराणिक कथा के अनुसार कहा जाता है कि सावन के महीने में भगवान शिव जी ने समुद्र मंथन से निकला विष पीकर सृष्टि की रक्षा की थी। यहीं कारण है कि इस महीने को शिव जी का प्रिय महीना माना जाता है।

Tuesday, 11 July 2017

यह जानकारी आपकी जिन्दगी बदल देगी l


                      सुबह के कर्तव्य 
ईश्वर दर्शन 

1) प्रथम कर्तव्य :-
सुबह उठते ही सबसे पहले अपने हथेली को देखना चाहिए जिसमे लक्ष्मी माता, सरस्वती माता और भगवान नारायण निवास करते है l जिनके दर्शन से सात्विक ऊर्जा का संचार होता है और मन प्रसन्न रहता है आत: निम्न मंत्र का उच्चारण करते हुए हुए सुबह की शुरुवात करे l
मंत्र :-
कराग्रे वसति लक्ष्मीः, कर मध्ये सरस्वती।
करमूले तू गोविन्दः, प्रभाते कर दर्शनम्।।
लक्ष्मी माता  

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2) द्वितीय कर्तव्य :-
सके पश्चात सीधे धारती पर पैर नहीं रखना चाहिए धरती माता भगवान नारायण के पत्नी है और इसीलिये पाव धरती पर रखने से पहले. माता से माफ़ी मांगी जाती है l
जिससे प्रसन्न हो कर माँ आशीर्वाद प्रदान करते हैं l
मंत्र :-
समुन्द्रवसने   देवि!       पर्वतस्तनमण्डले
विष्णुपत्नि!नमस्तुभ्यंपादस्पर्शं क्षमस्व मे।  
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आइए सब मिल कर सनातन धर्म (हिंदू) को जूगो जूगो तक रहे इसका प्रबंध करना है l
            अपने दोस्तों अपने परिजनो और अपने बच्चों को सनातन धर्म के बारे मे बताए उन्हे बताए कि सनातन धर्म ही अकेले ऐसा धर्म है जो मनव द्वारा बनाई गई नहीं है श्रीष्टि के प्रराँभ से ही हिन्दू धर्म रहा है