Friday, 19 June 2020

21 jun 2020 ko lagne wale surya grahan se judi jankari.



आगामी 21 जून को इस साल 2020 का पहला सूर्यग्रहण (Solar Eclipse) लग रहा है जो कई मायनों में खास है।  ग्रहण रविवार की सुबह करीब 10.33 बजे से शुरू होकर अपराह्न 02.04 बजे तक चलेगा।

ज्योतिष के अनुसार ग्रहण के 12 घंटे पहले लगेगा सूतक प्रारंभ होगा l

ज्योतिषिय दृष्टि से देखें तो इस सूर्य ग्रहण के 12 घंटे पहले सूतक काल लग जाएगा। सूतक काल 20 जून की रात 10.33 बजे से आरंभ हो जाएगा।

 सूर्य ग्रहण का मध्‍य काल दोपहर 12.18 बजे होगा। इसके पहले शनिवार 20 जून की रात करीब 10.33 बजे से ही सूतक काल शुरू हो जाएगा।

 यह पूर्ण सूर्य ग्रहण होगा तथा इसमें सूर्य का किनारे का गोलाकर भाग ही दिखाई देगा, इसे 'रिंग ऑफ फायर' (Ring of Fire) भी कहा जाता है। इस कारण सूर्य ग्रङण के दौरान दिन में अंधेरा छा जाएगा।

 ये सूर्य ग्रहण रोमांचक होगा और ज्योतिषियों के मुताबिक इस ग्रहण का विभिन्न राशियों पर अलग-अलग प्रभाव पड़ेगा।

सूर्यग्रहण एक समान्‍य खगोलीय घटना है। चंद्रमा (Moon) के पृथ्‍वी (Earth) और सूर्य (Sun) के बीच आने के कारण सूर्यग्रहण होता है। इस दौरान पृथ्‍वी पर चंद्रमा की छाया (Shadow) पड़ती है। जिस जगह यह छाया पड़ती हैवहां आंशिक रूप से अंधेरा हो जाता है।

                21 जून को लग रहा सूर्यग्रहण देखने में रिंग ऑफ फॉयर की तरह लगेगा। सूर्य का 88 फीसद भाग तीन घंटे 22 मिनट तक चंद्रमा की ओट में रहेगाजिससे सूर्य का किनारे का रिंग की तरह का गोलाकर भाग दिखाई देगा।

       इसे ही 'रिंग ऑफ फायरकहा जाता है। रिंग ऑफ फायर का कुछ सेकेंड से लेकर 12 मिनट तक दिखाई देगा।

नंगी आंखों से नहीं देखें सूर्यग्रहण हो सकता है नेत्रा संबंधी शिकायत l

सूर्य ग्रहण के दौरान सूर्य को नंगी आंखों से सीधे देखना घातक होता है। इस दौरान सूर्य से खतरनाक किरणें निकलती हैंजो सीणे देखने पर आंखों को नुकसान पहुंचा सकती हैं। 

      इससे हम अंधे तक हो सकते हैं। सूर्यग्रहण देखने के लिए खास तरह के चश्मों का इस्तेमाल किया जा सकता है। ग्रहण के दौरान सूर्य की अवरक्त और पराबैंगनी किरणें (Altra violate Rays) आंखों को भारी क्षति पहुंचा सकती हैं।

 

सूर्य ग्रहण पर ऐसे हो रही उल्टी चाल

21 जून को मिथुन राशि में लगने वाला सूर्य ग्रहण शुभ नहीं हैक्योंकि इस दौरान कई ग्रहों की चाल विपरीत रहेगी। इस दौरान संबंधित ग्रहों के मंत्रों का जाप करने से राहत मिल सकती है।

 

मंत्र :- ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।

उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥
 
इस माहा मृतुंजय मंत्र का जाप ग्रहण के दौरान करने से सभी तरह के ग्रहण दोष से मुक्त होंगे l  
इस दौरान बाहर नहीं निकलना चाहिए। मंदिर भी बंद रखे जाते हैं। ज्‍याेतिषाचार्य कहते है , कि ग्रहण के दौरान खाने से परहेज किया जाता है।

 इस दौरान पानी भी नहीं पीना चाहिए। गर्भवती महिलाओं को कोई काम नहीं करना चाहिए। शास्‍त्रों के अनुसार ग्रहण के बाद स्नान कर भगवान विष्णु की पूजा करें और उसके बाद ही कोई अन्य कार्य करने का विधान है।

 ग्रहण के बाद स्नान व दान करके ही भोजन ग्रहण करें तथा खाना बनने के बाद उसमें कुश या तुलसी पत्र डालें। हालांकिशास्‍त्रों में उल्‍लेखित ये बातें आस्‍था व विश्‍वास से जुड़ी परंपराएं हैं।

 




Tuesday, 18 July 2017

जाने श्रावन का महत्व

क्यु प्रिय है श्रावन शिव जी को :-धार्मिक मान्यताओं के अधार पर सावन महीने के बारे में सबसे प्रचलित पौराणिक कथा के मुताबिक शिव पत्‍नी देवी सती के अपने पिता दक्ष के घर योगशक्ति से शरीर त्यागने से पूर्व उन्‍होंने शिव जी को हर जन्म में पति के रूप में पाने का प्रण किया था। इसीलिए उन्‍होंने अपने दूसरे जन्म में पार्वती के रूप में भगवान शिव जी की पूजा की और सावन के महीने में कठोर तप किया। इस पूजा से प्रसन्‍न होकर शिवजी ने उनसे विवाह कर लिया। तभी से ये महीना शिव जी के लिए प्रिय हो गया। ये कथा स्‍वयं शिजी ने सनत कुमारों को सुनाई थी जब उन्‍होंने सावन का महीना प्रिय होने के बारे में पूछा था। एक अन्‍य पौराणिक कथा के अनुसार कहा जाता है कि सावन के महीने में भगवान शिव जी ने समुद्र मंथन से निकला विष पीकर सृष्टि की रक्षा की थी। यहीं कारण है कि इस महीने को शिव जी का प्रिय महीना माना जाता है।

Tuesday, 11 July 2017

यह जानकारी आपकी जिन्दगी बदल देगी l


                      सुबह के कर्तव्य 
ईश्वर दर्शन 

1) प्रथम कर्तव्य :-
सुबह उठते ही सबसे पहले अपने हथेली को देखना चाहिए जिसमे लक्ष्मी माता, सरस्वती माता और भगवान नारायण निवास करते है l जिनके दर्शन से सात्विक ऊर्जा का संचार होता है और मन प्रसन्न रहता है आत: निम्न मंत्र का उच्चारण करते हुए हुए सुबह की शुरुवात करे l
मंत्र :-
कराग्रे वसति लक्ष्मीः, कर मध्ये सरस्वती।
करमूले तू गोविन्दः, प्रभाते कर दर्शनम्।।
लक्ष्मी माता  

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2) द्वितीय कर्तव्य :-
सके पश्चात सीधे धारती पर पैर नहीं रखना चाहिए धरती माता भगवान नारायण के पत्नी है और इसीलिये पाव धरती पर रखने से पहले. माता से माफ़ी मांगी जाती है l
जिससे प्रसन्न हो कर माँ आशीर्वाद प्रदान करते हैं l
मंत्र :-
समुन्द्रवसने   देवि!       पर्वतस्तनमण्डले
विष्णुपत्नि!नमस्तुभ्यंपादस्पर्शं क्षमस्व मे।  
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आइए सब मिल कर सनातन धर्म (हिंदू) को जूगो जूगो तक रहे इसका प्रबंध करना है l
            अपने दोस्तों अपने परिजनो और अपने बच्चों को सनातन धर्म के बारे मे बताए उन्हे बताए कि सनातन धर्म ही अकेले ऐसा धर्म है जो मनव द्वारा बनाई गई नहीं है श्रीष्टि के प्रराँभ से ही हिन्दू धर्म रहा है 

Wednesday, 28 September 2016

सुविचार

संसार का सच 

  • संसार में जितनी भी तरक्की कर लो अंत में सभी भौतिक सुखों को त्याग कर आत्मशांति की ही तलाश करोगे। 
  • दुनिया कितनी भी सुन्दर क्यों न हो दुनिया से कभी मोह नहीं रखना चाहिए। 
  • दुनिया ख़राब है कहने वाले क्या खुद सही हो ?
  • दुनिया को जिस नजर से देखोगे उसी तरह नजर आएगी l
  • दुनिया बनाने वाले ने इसलिए तुमको नहीं  बनाया कि तुम दुनिया को गलत कहो l
  • भूख सारे हदे तोड़ देता है और पैसा का घमंड सारे रिश्ते तोड़ देता है l
  • सभी लोग अपने अपने  काम से व्यस्त है किसी को समय नहीं की तुम्हारी गलतिया खोजने लगा हो निस्वार्थ भाव से अपना काम करते रहो l
  • मुख्यमंत्री सिर्फ अपने राज्य मे ही सम्मान पाता है लेकिन विद्यावान पूरे विश्व मे सम्मान पाता है l