आगामी 21 जून को इस साल 2020 का पहला सूर्यग्रहण (Solar Eclipse) लग रहा है जो कई मायनों में खास है। ग्रहण रविवार की सुबह करीब 10.33 बजे से शुरू होकर अपराह्न 02.04 बजे तक चलेगा।
ज्योतिष के अनुसार ग्रहण के 12 घंटे पहले
लगेगा सूतक प्रारंभ होगा l
ज्योतिषिय दृष्टि से देखें तो इस सूर्य ग्रहण के 12 घंटे पहले सूतक
काल लग जाएगा। सूतक काल 20 जून की रात 10.33 बजे से आरंभ हो
जाएगा।
सूर्य ग्रहण का मध्य काल दोपहर 12.18 बजे होगा। इसके पहले शनिवार 20 जून की रात करीब 10.33 बजे से ही सूतक काल शुरू हो जाएगा।
यह पूर्ण सूर्य ग्रहण होगा तथा इसमें सूर्य का किनारे का गोलाकर भाग ही दिखाई देगा, इसे 'रिंग ऑफ फायर' (Ring of Fire) भी कहा जाता है। इस कारण सूर्य ग्रङण के दौरान दिन में अंधेरा छा जाएगा।
ये सूर्य ग्रहण रोमांचक होगा और ज्योतिषियों के मुताबिक इस ग्रहण का विभिन्न राशियों पर अलग-अलग प्रभाव पड़ेगा।
सूर्यग्रहण एक समान्य खगोलीय घटना है। चंद्रमा (Moon) के पृथ्वी (Earth) और सूर्य (Sun) के बीच आने के कारण सूर्यग्रहण होता है। इस दौरान पृथ्वी पर चंद्रमा की छाया (Shadow) पड़ती है। जिस जगह यह छाया पड़ती है, वहां आंशिक रूप से अंधेरा हो जाता है।
21 जून को लग रहा
सूर्यग्रहण देखने में रिंग ऑफ फॉयर की तरह लगेगा। सूर्य का 88 फीसद भाग तीन
घंटे 22 मिनट तक चंद्रमा की ओट में रहेगा, जिससे सूर्य का
किनारे का रिंग की तरह का गोलाकर भाग दिखाई देगा।
इसे ही 'रिंग ऑफ फायर' कहा जाता है।
रिंग ऑफ फायर का कुछ सेकेंड से लेकर 12 मिनट तक दिखाई देगा।
नंगी आंखों से नहीं देखें सूर्यग्रहण हो सकता है नेत्रा
संबंधी शिकायत l
सूर्य ग्रहण के दौरान सूर्य को नंगी आंखों से सीधे देखना घातक होता है। इस
दौरान सूर्य से खतरनाक किरणें निकलती हैं, जो सीणे देखने पर आंखों को
नुकसान पहुंचा सकती हैं।
इससे हम अंधे तक हो सकते हैं।
सूर्यग्रहण देखने के लिए खास तरह के चश्मों का इस्तेमाल किया जा सकता है। ग्रहण के
दौरान सूर्य की अवरक्त और पराबैंगनी किरणें (Altra violate
Rays) आंखों को भारी क्षति पहुंचा सकती हैं।
सूर्य ग्रहण पर ऐसे हो रही उल्टी चाल
21 जून को मिथुन राशि में लगने वाला सूर्य ग्रहण शुभ नहीं है, क्योंकि इस
दौरान कई ग्रहों की चाल विपरीत रहेगी। इस दौरान संबंधित ग्रहों के मंत्रों का जाप
करने से राहत मिल सकती है।
मंत्र :- ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।
उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥
इस दौरान पानी भी नहीं पीना चाहिए। गर्भवती महिलाओं को कोई काम नहीं करना चाहिए। शास्त्रों के अनुसार ग्रहण के बाद स्नान कर भगवान विष्णु की पूजा करें और उसके बाद ही कोई अन्य कार्य करने का विधान है।
ग्रहण के बाद स्नान व दान करके ही भोजन ग्रहण करें तथा खाना बनने के बाद उसमें कुश या तुलसी पत्र डालें। हालांकि, शास्त्रों में उल्लेखित ये बातें आस्था व विश्वास से जुड़ी परंपराएं हैं।



